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Wednesday, 1 November 2023

होता यहां नीम का एक पेड़

 

जहां तेज धूप की माया में

नीम की घनी छाया में 

रख देते एक खटिया

बिछा देते एक पटिया

तुम बैठते

वह बैठता

हम भी बैठते

फिर होती खट्टी - मीठी बतिया ।

राग -द्वेष स्वतः मिट जाते

क्यों स्वार्थ में फिर भटकते ।

पुलिस कचहरी की बात नहीं होती

जरूर करते एक दूसरे को नमस्ते ।


काका के घर की चीनी होती

भाई के घर का प्याला,

तुम चाय बनवाते

हम भिजवाते ठेकुआ का डाला ।

न घर तोड़ने की बात होती

और न होता कोई बंटवारा !


होता यहां नीम का एक पेड़

हम सब मिल बतिया लेते ढेर।


अमर नाथ ठाकुर,1 नवंबर, 2023, कोलकाता।

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