हमारी , आपकी और व्यवस्था की बातें , संयोग-वियोग की बातें , चेतना को झकझोरती , उद्वेलित करती बातें , हर्ष-विस्मय , दुःख-विषाद की वो बातें जो कम मौकों पर कह पाए या जिसकी अभिव्यक्ति हो ही नहीं सकी ..............
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Saturday, 11 August 2012
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धर्म, विचार और सभ्यताओं का भविष्य
धर्म, विचार और सभ्यताओं का भविष्य मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही उसका समाज बनता है। उसके विचार शून्य में जन्म नहीं लेते; वे उसके धर्म, दर्शन...
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बिहार का चुनाव कई मायने में अनोखा होता है।चुनावी विश्लेषक बिहार के चुनावी परिणामों की सटीक भविष्यवाणी करने में सामान्यतः असमर्थ साबित होते ...
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बंगाल: एक व्यवस्था का अवसान और अनिश्चित भविष्य की दहलीज पश्चिम बंगाल के हालिया चुनाव परिणाम केवल एक राजनीतिक दल की हार और दूसरे की जीत नहीं ...
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भाषा अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम होती है । नृत्य की भाषा अलग होती है । लोग इशारों में भी बात करते हैं । लेकिन यदि भाषा के प्रयोग में का...
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हमारा मित्र हमें ब्राह्मण कहने लगा है हमारा मित्र हमें अब ब्राह्मण कहने लगा है और अब हमसे कट-कट कर रहने लगा है । हमारा मित्र कायस्थ क्षत...
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बंगाल में नया विहान: भय के अवसान और विडंबनाओं के उदय की दास्तान चार मई के बाद से बंगाल में रोज़ एक नया सवेरा मालूम पड़ता है। नई दोपहर और नई ...
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- १- अलगनी पर फैला भींगा-भींगा तौलिया मैला उस पर कमीज़ और उसके ऊपर पायजामा कपड़ों और सिर्फ कपड़ों का हंगामा . बिछौने की सिल...
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माँ मेरी भौजिया (भौजी) है. हम सभी सातों भाई - बहन माँ को भौजी या भौजिया ही कहकर बुलाते हैं. बचपन से ही ऐसा चला आ रहा है. हमारे काका लोग हम...
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भ्रष्टाचार समाज और देश का सबसे बड़ा दुश्मन और अन्य अधिकांश बुराइयों की जड़ है। यह किसी देश की समृद्धि में सबसे बड़ा रोड़ा है। जिस समाज या दे...
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फिर चुनाव आया है . चुनाव तो आता ही रहता है. मुद्दे बदलते रहते हैं. इस बार चुनाव के मुद्दे क्या हैं विकास, भ्रष्टाचार, काला धन, राष्ट्...
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धर्म, विचार और सभ्यताओं का भविष्य मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही उसका समाज बनता है। उसके विचार शून्य में जन्म नहीं लेते; वे उसके धर्म, दर्शन...
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