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Tuesday, 21 April 2015

चोर जब पहरेदार बनेंगे



चोर जब पहरेदार बनेंगे
डाकू जब थानेदार सजेंगे ...
कोलाहल से क्यों न भंग होगी नीरवता
क्रन्दन से पस्त होगी मुस्कान की मधुरता
कायरता से तब पराजित होगी वीरता 
चारों तरफ रहेगी ईमानदारी की विवशता 
लूट से प्रताड़ित होती रहेगी पूरी व्यवस्था । 


दुर्योधनों का मान बढ़ेगा
दुःशासनों का शान चढ़ेगा । 
शकुनि के पाशे तब और जीतेंगे
पांडव आजीवन वनवास करेंगे । 
पूरा होगा द्रौपदियों का चीरहरण 
होलिकाएँ  करेंगीं बेशुमार नर्त्तन ।

हिरण्यकशिपुओं के जब भजन-कीर्त्तन चलेंगे ,
प्रह्लादों की सिसकी और क्रंदन फिर क्यों रूकेंगे ! 


चोर जब पहरेदार बनेंगे  
डाकू जब थानेदार सजेंगे ...


अमर नाथ ठाकुर , 30 मार्च , 2015 , कोलकाता ।   

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