Saturday, 4 February 2017

जिन्दगी में कुछ नहीं कर सकते

जिन्दगी में कुछ नहीं कर सकते

जब नहीं बोल सकते थे
जब नहीं चल सकते  थे
जब नहीं सोच सकते  थे
क्योंकि तब तो बच्चे थे ।
तब जुबान कड़वी नहीं थी
शरीर में दम नहीं था
मन किन्तु कितना सच्चा था ।
और सब दिखता अच्छा था ।

फिर जब बोलने लगे तो गलत ही बोलते थे
फिर जब चलने लगे तो गलत रास्ते ही चलते थे
फिर जब सोचने लगे तो  फिर गलत ही सोचते थे
क्योंकि तब तक जवान जो हो गये  थे ।
मन ,शरीर और सोच लहूलुहान हो गये थे ।

अब फिर नहीं बोल सकते क्योंकि जबान लड़खड़ाती है
चल नहीं सकते  क्योंकि कदम लड़खड़ाते हैं
अब सोच भी  नहीं सकते क्योंकि सोच गड़बड़ाते हैं
क्योंकि बूढ़ा जो हो चले हैं ।

पूरी जिन्दगी न बोल सकते
पूरी जिन्दगी न चल सकते
पूरी जिन्दगी न सोच सकते ,
तो फिर क्या यही है जिन्दगी ?

यही जिन्दगी है जब नहीं कुछ कर सकते ।

अमर नाथ ठाकुर , 4 फरवरी , 2017 , मेरठ ।


No comments:

Post a Comment

बिहार की शराबबंदी: एक संकट/ भ्रष्टाचार का एक नया अध्याय?

बिहार की शराबबंदी: एक संकट/ भ्रष्टाचार का एक नया अध्याय? बिहार में वर्षों से शराबबंदी लागू है। इस निर्णय के कारण बिहार सरकार को शराब उद्योग...