क्रिकेट में प्रतिभा बनाम राजनीति: वैभव सूर्यवंशी का संघर्ष
वैभव सूर्यवंशी की असाधारण प्रतिभा और आईपीएल में उनके शानदार प्रदर्शन ने बीसीसीआई को सोचने पर मजबूर कर दिया। इसी का परिणाम था कि उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड के आगामी टी-20 दौरे के लिए भारतीय टीम में शामिल करना पड़ा। देश के कई दिग्गज और रिटायर्ड क्रिकेटरों का भी यही मानना था कि वैभव जैसी उभरती हुई प्रतिभा को तराशने के लिए आयरलैंड जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ पदार्पण (डेब्यू) का मौका देना एक बेहतरीन रणनीति होगी। मात्र 15 वर्ष की आयु में अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिलने से न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ता, बल्कि भविष्य में इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ खेलने के लिए वे मानसिक रूप से तैयार भी हो पाते। 15 वर्ष के इस बच्चे में अगले 20-25 वर्षों तक देश के लिए खेलने की अद्भुत क्षमता है।
लेकिन दुर्भाग्यवश, भारतीय क्रिकेट के गलियारों में गुटबाजी और अंदरूनी राजनीति की जड़ें बहुत गहरी हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर एक विशेष समूह या दल को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। वैभव जैसी अद्वितीय क्षमता वाले खिलाड़ी का इतनी कम उम्र में टीम में आना और अंतिम एकादश (प्लेइंग इलेवन) में अपनी जगह पक्की कर लेना, कहीं न कहीं स्थापित और सीनियर खिलाड़ियों के लिए एक अनजाना डर बन गया है। अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा या श्रेयस अय्यर जैसे खिलाड़ियों ने हाल के वर्षों में ही अपने पैर जमाए हैं। ऐसे में एक अत्यंत युवा खिलाड़ी का टीम में प्रवेश सीनियरों के करियर के लिए खतरे की घंटी माना जाने लगता है।
आरोप लग रहे हैं कि मुख्य कोच गौतम गंभीर वैभव जैसी नई प्रतिभा को फलने-फूलने का उचित माहौल नहीं देना चाहते। पहले मैच में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा था, जिससे कोच गंभीर पर एक बड़ा असमंजस और भारी दबाव था। उम्मीद थी कि इस हार के बाद टीम प्रबंधन अपनी गलती सुधारेगा, लेकिन दूसरे मैच में भी वैभव को अंतिम एकादश से बाहर रखकर बेंच पर ही बैठाए रखा गया। यह फैसला साफ तौर पर इस रणनीति को दर्शाता है कि सीनियर खिलाड़ियों को अपने खराब प्रदर्शन को सुधारने के लिए अतिरिक्त मौके दिए जाएं, ताकि वैभव को टीम में शामिल करने की नौबत ही न आए। यदि ये सीनियर खिलाड़ी जैसे-तैसे अच्छा स्कोर कर देते हैं, तो वैभव को आगे के मैचों, विशेषकर इंग्लैंड के खिलाफ, टीम से बाहर रखने का एक ठोस बहाना मिल जाएगा कि 'अच्छा प्रदर्शन करने वाले सीनियर को कैसे हटाया जाए'। हालांकि, टीम में चयन होना एक बात है और अंतिम ग्यारह में जगह मिलना दूसरी बात, जो वर्तमान परिस्थितियों में बेहद कठिन कर दी गई है।
जब वैभव का चयन आईपीएल के उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर हुआ है, तो लगातार दूसरे मैच में भी उन्हें अंतिम एकादश से बाहर रखने का कोई तार्किक कारण नहीं बनता। यह निर्णय एक संकीर्ण, असुरक्षित और कुत्सित मानसिकता को दर्शाता है, जो नई प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के बजाय उन्हें दबाने का प्रयास करती है। अतीत में भी गौतम गंभीर का स्वभाव मैदान पर आक्रामक और विवादों से घिरा रहा है। ऐसे में, खेल के मैदान से परे राजनीतिक रसूख के बल पर कोच जैसे गरिमामयी पद पर उनका आसीन होना और इस तरह के फैसले लेना, भारतीय क्रिकेट के भविष्य को अंधकार में धकेलता हुआ प्रतीत होता है।
अमर नाथ ठाकुर, 28 जून, 2026, कोलकाता।
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