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Thursday, 8 December 2011

“इस जीवन” का सार




आँसुओं की खुशी एवं हँसी का क्रन्दन

यह न कोई व्यतिक्रम –


आते  आँसू खुशी में एवं दुःख में मंदहास –

क्योंकि यह तो मृत्यु है , जब मुझ में गति है –

जीवन तो तब आएगा

रुक जाएगी जब साँस –

जब पहनूँगा मृत्यु-पुष्प  का हार

वह होगा जीवन का द्वार –

जो इस “जीवन” के पार

यही है इस “जीवन” का सार –

----------------------------------------------------अमरनाथ ठाकुर,१९९९ .

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