यदि नहीं कहें तो ये मत समझना कि कह रहे हैं -
यदि कह जायं तो ये मत समझना कि 'शो ' कर रहे हैं -
यदि हँस जायं तो ये मत समझना कि ग़मों को छुपा रहे हैं -
लेकिन यदि रो जायं तो समझना दर्द बटोर रहे हैं -
हमारी , आपकी और व्यवस्था की बातें , संयोग-वियोग की बातें , चेतना को झकझोरती , उद्वेलित करती बातें , हर्ष-विस्मय , दुःख-विषाद की वो बातें जो कम मौकों पर कह पाए या जिसकी अभिव्यक्ति हो ही नहीं सकी ..............
धर्म, विचार और सभ्यताओं का भविष्य मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही उसका समाज बनता है। उसके विचार शून्य में जन्म नहीं लेते; वे उसके धर्म, दर्शन...
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