हमारी , आपकी और व्यवस्था की बातें , संयोग-वियोग की बातें , चेतना को झकझोरती , उद्वेलित करती बातें , हर्ष-विस्मय , दुःख-विषाद की वो बातें जो कम मौकों पर कह पाए या जिसकी अभिव्यक्ति हो ही नहीं सकी ..............
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Thursday, 8 December 2011
दर्द बाँट रहे हैं
यदि नहीं कहें तो ये मत समझना कि कह रहे हैं -
यदि कह जायं तो ये मत समझना कि 'शो ' कर रहे हैं -
यदि हँस जायं तो ये मत समझना कि ग़मों को छुपा रहे हैं -
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